Video: रावणभाठा में 150 वर्ष पुरानी है रावणप्रतिमा, दहन नहीं होता है वध

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08 Oct , 2019

रायपुर के रावणभाठा मैदान की कहानी भी कुछ इस तरह है। यहां एक बड़े निर्जन मैदान में स्थापित है 150 वर्ष पुरानी रावण के दस सिर वाली विशालकाय प्रतिमा। वर्ष भर यह प्रतिमा अकेले गांव के बाहर मैदान में खड़ी रहती है। प्रतिमा के आस पास लोगों का आना जाना तो होता है लेकिन समीप ना किसी का निवास होता है और ना किसी का ठहराव। इसका कारण है छत्तीसगढ़ के निवासियों का स्वभाव। यदि व्यक्ति राम की तरह पावन है तो आदर के साथ वह सर्वजनों के बीच है नहीं तो रावण की बुराई वाली प्रवृत्ति रखने वालों को यहां स्थान नहीं है। वनवास के दौरान भगवान राम छत्तीसगढ़ जिसे दक्षिणकोशल भी कहा जाता है आए थे। इसके बाद लोगों को जब रावण वध का समाचार मिला तो इसे याद रखने रावण की प्रतिमा स्थापित कर उसके वध की परम्परा शुरु की गई। रावण की प्रतिमा का एक पैर जंजीर से जकड़ा है। दशहरे के दिन प्रतीकात्मक रूप से इसका वध किया जाता है। वहीं समीप रावण की लकड़ी की प्रतिमा का निर्माण किया जाता है जिसका दशहरे की शाम दहन होता है। 

Harshit Sharma

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