Exclusive: ममता तेरी निर्मल कोमल : जय प्रकाश त्रिपाठी

LIFESTYLE / LITERATURE TALKS

15 Oct , 2018

ममता तेरी निर्मल कोमल,  स्वच्छ सलिल ज्यूं गंगा का जल।सौम्य शिष्ठ निच्छल पावन सा, शीतल चंदन समतल अविरल।। ऐसी पंक्तियों से मां का चित्रण करने वाले कविता के कुशल चितेरे कवि, कहानीकार जय प्रकाश त्रिपाठी से आज जानते हैं उनके जीवन के बारे में। इसके साथ ही सुनते हैं उनकी कुछ कविताएं।

R P Singh

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