Exclusive: घर की चारदीवारी पर पहरा कांच और कीलों का: मनजीत अदब

LIFESTYLE / LITERATURE TALKS

27 Oct , 2018

घर की चारदीवारी पर पहरा कांच और कीलों का, कौए कब के फुर्र हो गए कब्जा है बस चीलों का। ऐसी पंक्तियों के रचयिता कवि मंजीत अदब भिलाई शहर में काफी लंबे अरसे लेखन कार्य कर रहे हैं। इन्होंने गद्य और पद्य दोनों ही विधाओं पर समान रूप से लेखन कार्य किया है। अपनी दिव्यांगता को इन्होंने कहीं से भी अपने मनोमस्तिष्क पर हावी नहीं होने दिया।

R P Singh

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